Inflation Will Hit Indians | अमेरिका से भारतीयों की जेब पर पड़ेगी महंगाई की मार ! आप कहेंगे, अब कौन सा नया संकट है? जानें क्या है माजरा
[ad_1]

दिल्ली: महंगाई (Inflation) के मोर्चे पर भारतीयों के लिए राहत (Relief) की संभावना अब भी दूर नजर आ रही है। अमेरिका (America) में केंद्रीय बैंक (Central Bank) का एक निर्णय भारत की इन्फ्लेशन (Inflation) की आग को और बढ़ा सकता है। इसलिए भारतीय नागरिकों को फिर से महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। 22 मार्च को अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक (Federal Reserve Bank Of America) वहां महंगाई पर काबू पाने के लिए एक बार फिर सख्त कदम (Strong Step) उठा सकता है और भारतीय (Indian) इसकी चपेट में आ जाएंगे।
केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी कर सकता है
महंगाई पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट (Interest Rate) में बढ़ोतरी कर सकता है। अगर यह फैसला होता है तो भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank) को भी रेपो रेट (Repo Rate) बढ़ाने पर फैसला करना होगा। महंगाई ने भारत को त्रस्त कर दिया है। अगर ब्याज दर बढ़ती है तो आपकी ईएमआई (EMI) बढ़ जाएगी। दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ाने पर अड़ा हुआ है। बैंक के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने इस बारे में संकेत दिया है। इसका खुलासा उन्होंने अभी नहीं किया है। हालाँकि, इस निर्णय की संभावना की भविष्यवाणी की जाती है। एक अनुमान के मुताबिक, केंद्रीय बैंक इस बार 0.50% बढ़ोतरी कर सकता है। यह लगातार दूसरी बार होगा जब इंटरेस्ट रेट में 0.50% की बढ़ोतरी होगी। इससे पहले, फेडरल रिजर्व ने लगातार दरों में 0.75% आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी।
यह भी पढ़ें
इन्फ्लेशन के आंकड़े कम होने के संकेत नहीं
अमेरिकी इन्फ्लेशन के आंकड़े कम होने के संकेत नहीं दिखा रहे हैं। पॉवेल (Powel) के संकेत के बाद मौजूदा बाजार भाव 5.5 से 5.75% के बीच बढ़ गया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के फैसले का भारतीय बाजार (Indian Market) पर सीधा असर पड़ेगा। महंगाई पर लगाम लगाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) का इंतजार करना होगा। अभी-अभी आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी की है। आने वाले दिनों में ब्याज दरों में 25 से 35 आधार अंकों की बढ़ोतरी होने की संभावना है। भारत के केंद्रीय बैंक ने मई 2022 से फरवरी 2023 तक रेपो दर में 2.50 प्रतिशत की वृद्धि की है। इससे ईएमआई का बोझ ग्राहकों की जेब पर पड़ा है।
[ad_2]
Source link