बिहार मतदाता सूची विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने मांगा चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण
बिहार वोटर लिस्ट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से आधार, राशन और वोटर कार्ड पर मांगा जवाब
नई दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए, जिसके बाद अदालत ने तीन अहम मुद्दों पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।
मामला क्या है?
बिहार में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण को कई याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आधार कार्ड को दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार न करना गलत है और यह नागरिकों के मताधिकार को प्रभावित कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख:
- चुनाव आयोग से पूछा गया है कि आधार, राशन और वोटर कार्ड को दस्तावेज़ों में क्यों नहीं जोड़ा गया।
- अदालत ने कहा कि प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
- आयोग को एक सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश।
मांगे गए तीन जवाब:
- दस्तावेज़ों के चयन का आधार क्या है?
- क्या प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है?
- मतदाता सूची से हटाए गए नामों की वैधता कैसे सुनिश्चित की गई?
चुनाव आयोग की सफाई:
आयोग ने अदालत को बताया कि बिना उचित प्रक्रिया के किसी का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। साथ ही आयोग ने आश्वासन दिया कि किसी भी मतदाता के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
अगली सुनवाई:
अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 28 जुलाई तय की है, तब तक सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने होंगे।
कोर्ट की टिप्पणी: “मतदाताओं के बिना चुनाव आयोग का अस्तित्व नहीं। हम किसी भी संवैधानिक संस्था को अपने कार्य करने से नहीं रोक सकते।”
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