स्वास्थ्य विभाग मेहरबान या लापरवाह: कानपुर में बिना रजिस्ट्रेशन धड़ल्ले से चल रहे अस्पताल ,जानें पूरा मामला
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आयुष तिवारी /कानपुर. कानपुर मेंं सैकड़ों अवैध हॉस्पिटल और ट्रॉमा सेंटर चल रहे हैं. कोई अस्पताल दो कमरे में चल रहा है तो कोई किराए के मकान में इनमें ज्यादातर में झोलाछाप इलाज के नाम पर मरीजों से वसूली कर रहे हैं. शहर में संचालित अवैध अस्पतालों में प्रशिक्षित स्टाफ नर्स नहीं होती हैं और न ही ट्रेड टेक्नीशियन रखे जाते हैं. इस तरह के अस्पतालों में लापरवाही की हद तो यह है कि आयुर्वेदिक स्नातक की डिग्री पर चिकित्सक गंभीर अवस्था के मरीजों का सीजर ऑपरेशन करते हैं. ऑपरेशन टेबल पर मरीजों का केस बिगड़ने पर बाहर से प्रशिक्षित चिकित्सकों को बुलाया जाता है.
जिले में अवैध रूप से चलाए जा रहे नर्सिग होम व अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा नहीं कसने से मानकों को ताक पर रखकर चलाए जाने वाले अवैध अस्पतालों के संचालको के हौसले बुलंद है. बिना रजिस्ट्रेशन व सुविधाओं के चल रहे अस्पतालों ने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल दी है. मनमाने तरीके से चलाए जा रहे अस्पतालों के सवालों के घेरे में आने के साथ ही विभागीय कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे है.शहर के कल्यानपुर क्षेत्र में तकरीबन 200 से अधिक अस्पताल मानक विहीन अस्पताल है. जो स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से बचें हुए हैं.
मरीजों की जान से कर रहे खिलवाड़
स्वास्थ्य विभाग के सेटिंग गेटिंग के खेल चलते इन अस्पतालों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती है. ये मानक विहीन अस्पताल बड़ी बीमारी बताकर अस्पताल आये हुए मरीजों का शोषण करते है. बिना पंजीकरण के अस्पतालों का संचालन करने वाले संचालक अथवा ऐसे जगहों पर तैनात डॉक्टर गम्भीर रूप से सामान्य बीमारी से बीमार मरीजों को भी बड़ी बीमारी बताकर लम्बा इलाज करते है और शोषण करते है. प्रसव के आने वाली महिलाओं को बिना जांच के ही ऑपरेशन की सलाह दे दी जाती है. जिससे कई बार महिलाओं व नवजात की जान भी चली जाती है.
जिले में संचालित हो रहे 500 से अधिक अस्पताल
कानपुर जिले में 5 सौ से अधिक अस्पताल व नर्सिग होम का संचालन किया जा रहा है. जहां पर ओपीडी से लगाकर ऑपरेशन तक की सुविधा मुहैया कराई जा रही है. संसाधनों के अभाव के बीच में प्रशासन की बगैर जानकारी के चल रहे है और इन अस्पतालों होने वाली मौतों का भी पता नहीं चल पाता है. मनमाने तरीके से चलने वाले अस्पतालों पर होने वाली मौतों तक का पता प्रशासन या लोगों को पता तब चलता है जब परिवार के लोग मामले की शिकायत करतें है या फिर मौत के बाद हो हल्ला करते है.पूरे मामलें को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आलोक रंजन का कहना है कि ऐसे अस्पतालों को चिन्हित करके स्वास्थ विभाग की कार्रवाई कर रहा है. उनको नोटिस दी जा रही है.
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FIRST PUBLISHED : June 23, 2023, 13:07 IST
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